हर साल करीब एक करोड़ से ज्यादा लोगों की कैंसर के कारण समय से पहले मौत के मुंह में चले जाते हैं. भारत में भी कैंसर के मामले खतरनाक तरह से बढ़ रहे हैं.भारत में कैंसर का 27 लाख लोग इलाज करा रहे हैं. 2020 में कैंसर और इससे संबंधित करीब 8.5 लाख लोगों की मौत हुई थी. अमेरिकी नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसीन के साइंटिफिक पेपर में कहा गया है कि वैसे तो कैंसर के कई कारण होते हैं लेकिन ज्यादातर कारणों के लिए लोग खुद जिम्मेदार होते हैं.
गले के कैंसर के कारण
नई दिल्ली स्थित सर गंगाराम अस्पताल में कैंसर विभाग के एसोसिएड कंसल्टेंट डॉ. आदित्य सरीन कहते हैं कि गले के कैंसर के अधिकांश मामलों में स्मोकिंग, तंबाकू और गुटखे की लत प्रमुख कारण होते हैं. इसके लिए हमारी बुरी आदतें सबसे ज्यादा जिम्मेदार होती है. इसके अलावा अल्कोहल और ह्यूमन पेपिलोमा वायरस (HPV) और जननांगों में मस्सा के लिए जिम्मेदार वायरस भी गले का कैंसर फैला सकता है.
गले के कैंसर के लक्षण
- 1.खांसी का नहीं जाना-डॉ. आदित्य सरीन बताते हैं कि कैंसर को शरीर में पलने में उसे लक्षण के रूप में आने में बहुत समय लगता है. जब किसी को गले का कैंसर होता है तो शुरुआत में कफ के कारण खांसी तेज होने लगती है. इससे छाती में भारीपन महसूस होता है. अगर यह दवा से ठीक न हो तो इस बात का खतरा ज्यादा है कि यह गले का कैंसर हो.
- 2. आवाज में भारीपन-गले के कैंसर में आवाज में भारीपन आने लगता है. आवाज में भारीपन या बदलाव एकदम शुरुआती लक्षण है. उन्होंने कहा कि कैंसर के कारण आवाज में भरभरहाटपन आने लगता है.
- 3. खाने निगलने में परेशानी-जब खाना खाते समय भोजन निगलने में दिक्कत होने लगे, ऐसा लगे कि जो आप खाए हैं वह गले में लटक रहा है तो यह खतरनाक संकेत हो सकते हैं. तुरंत डॉक्टर के पास भागें.
- 4-वजन में कमी-हालांकि वजन में कमी के कई कारण है लेकिन अगर आवाज में भारीपन, खाना निगलने में परेशानी से पहले से वजन में अचानक तेज गिरावट हो जाए तो यह गले का कैंसर हो सकता है.
- 5. कान में दर्द-अगर कान में लगातार दर्द है और उपर के कुछ लक्षण भी साथ में हैं तो गले का कैंसर हो सकता है. इसलिए यह न समझें कि कान में दर्द सिर्फ कान की ही बीमारी है.
